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पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया

कैंपस टू कम्युनिटी के द्वारा किया गया यह एनएसएस अभियान गांव के बच्चों के लिए कुछ लाभदायक हो और उन्हें बेहतर शिक्षा देने में मददगार हो



दो दिवसीय एनएसएस अभियान

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Nisha Singh


एन.एस.ओजे ब्यूरो

शिक्षा एक मात्र ऐसा रास्ता है जो देश को उन्नति की तरफ ले जाता है और हमारी सोच को सही दिशा में प्रभावित करते हैं| देश में कई ऐसे जगह है जहां लोग शिक्षा से वंचित है| इन बातों को ध्यान में रखते हुए बेंगलुरु (कर्नाटक) में 'कैंपस टू कम्युनिटी' नामित 'स्कूल बेल' ने नेशनल सर्विस स्कीम अभियान आयोजित किया|

इस अभियान का मुख्य मकसद था कि बंगलुरु रूरल में स्थित बच्चों को शिक्षा से जुड़ी समस्याओं में किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है इस बात को देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाना| ताकि गांव वालों के लिए कुछ मददगार हो सके, जिसमें बेंगलुरु के विभिन्न क्षेत्रों से स्कूल और कॉलेजों ने हिस्सा लिया|

इन स्कूल और कॉलेजों से आए हुए छात्रों की कुल संख्या 5000 से ऊपर थी| इन छात्रों के पास एक मौका था कि वे अपने कार्य द्वारा जिनमें वह परिपूर्ण थे उनका उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए कुछ काम आ सके|

एनएसओजे से लगभग 45 छात्र ने इस अभियान में हिस्सा लिया| यह दो दिवसीय एनएसएस अभियान 20 सितंबर से 22 सितंबर तक चला| इस अभियान की शुरुआत शाम को 6:00 बजे शेषाद्रीपुरम से बस से लगभग 20-35 किलोमीटर की यात्रा करके हुई| वॉलिंटियर्स अलग-अलग गतिविधियों में व्यस्त थे| कुछ छात्र स्कूल की साफ सफाई और कुछ छात्र स्कूल पर अपनी कलाकृति दिखा रहे थे| जहां दूसरे कॉलेज एवं स्कूल से आए आर्किटेक्चर के छात्रों ने गांव के स्कूल में कलाकारी करके उसे आकर्षित बनाने की कोशिश की ताकि लोग अपने बच्चों का दाखिला स्कूल में करवाएं|

वहीं एनएसओजे के छात्रों को ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल के शिक्षकों एवं छात्रों का इंटरव्यू करना था ताकि उनकी जरूरतों का पता लगा सके| दो दिन की इस अभियान में एनएसओजे के सभी छात्रों ने लगभग 30 से अधिक स्कूल में यात्रा की|

शिक्षा से जुड़े परिस्थितियों में गांव की आम समस्या

सभी स्कूल के शिक्षकों एवं छात्रों से इंटरव्यू के दौरान पता चला, वहां की आम समस्या यह थी कि उनके पास शिक्षकों की कमी थी और कक्षा संख्या के अनुसार कक्षा नहीं थी बिजली, पेयजल और शौचालय से जुड़ी समस्या भी थी| छात्रों को स्कूल तक जाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की भी समस्या थी|

उम्मीद है कि यह अभियान उन गांव के बच्चों के लिए मददगार होगा एवं स्कूल को आकर्षित बनाने की इस परियोजना के बाद वहां के बच्चे स्कूल में दाखिला होने के प्रति दिलचस्पी दिखाएंगे|


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